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अष्टावक्र गीता • अध्याय 7 • श्लोक 3
मय्यनंतमहांभोधौ विश्वं नाम विकल्पना। अतिशांतो निराकार एतदेवाहमास्थितः॥
मुझ अनंत महासागर में विश्व एक अवास्तविकता (स्वप्न) है, मैं अति शांत और निराकार रूप से स्थित हूँ।
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