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अष्टावक्र गीता • अध्याय 20 • श्लोक 11
क्व माया क्व च संसारः क्व प्रीतिर्विरतिः क्व वा। क्व जीवः क्व च तद्ब्रह्म सर्वदा विमलस्य मे॥
सदा विशुद्ध मेरे लिया क्या माया है और क्या संसार, क्या प्री ति है और क्या विरति, क्या जीव है और क्या वह ब्रह्म।
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