यथा न तोयतो भिन्नास्-तरंगाः फेन बुदबुदाः ।
आत्मनो न तथा भिन्नं विश्वमात्मविनिर्गतम् ॥
जिस प्रकार पानी लहर, फेन और बुलबुलों से पृथक नहीं है उसी प्रकार आत्मा भी स्वयं से निकले इस विश्व से अलग नहीं है।
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