न प्रीयते वन्द्यमानो निन्द्यमानो न कुप्यति।
नैवोद्विजति मरणे जीवने नाभिनन्दति॥
वंदना करने से वह प्रसन्न नहीं होता, निंदा करने से क्रोधित नहीं होता।
मृत्यु से उद्वेग नहीं करता और जीवन का अभिनन्दन नहीं करता।
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