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अष्टावक्र गीता • अध्याय 18 • श्लोक 91
भिक्षुर्वा भूपतिर्वापि यो निष्कामः स शोभते। भावेषु गलिता यस्य शोभनाशोभना मतिः॥
राजा हो या रंक, जो कामना रहित है वह ही सुशोभित होता है। जिसकी दृश्य वस्तुओं में शुभ और अशुभ बुद्धि समाप्त हो गयी है वह निष्काम है।
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