सर्वत्रानवधानस्य न किंचिद् वासना हृदि।
मुक्तात्मनो वितृप्तस्य तुलना केन जायते॥
जो इस दृश्य प्रपंच पर ध्यान नहीं देता, आत्म तृप्त है, जिसके ह्रदय में जरा सी भी कामना नहीं होती - ऐसे मुक्तात्मा की तुलना किसके साथ की जा सकती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
अष्टावक्र गीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
अष्टावक्र गीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।