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अष्टावक्र गीता • अध्याय 18 • श्लोक 50
स्वातंत्र्यात्सुखमाप्नोति स्वातंत्र्याल्लभते परं। स्वातंत्र्यान्निर्वृतिं गच्छेत्-स्वातंत्र्यात् परमं पदम्॥
स्वतंत्रता से ही सुख की प्राप्ति होती है। स्वतंत्रता से ही परम तत्त्व की उपलब्धि होती है । स्वतंत्रता से ही परम शांति की प्राप्ति होती है। स्वतंत्रता से ही परम पद मिलता है।
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