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अष्टावक्र गीता • अध्याय 18 • श्लोक 46
निर्वासनं हरिं दृष्ट्वा तूष्णीं विषयदन्तिनः। पलायन्ते न शक्तास्ते सेवन्ते कृतचाटवः॥
कामना रहित ज्ञानी सिंह है, उसे देखते ही विषय रूपी मतवाले हाथी चुपचाप भाग जाते हैं उनकी एक नहीं चलती उलटे वे तरह-तरह से खुशामद करके सेवा करते हैं।
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