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अष्टावक्र गीता • अध्याय 17 • श्लोक 16
न हिंसा नैव कारुण्यं नौद्धत्यं न च दीनता। नाश्चर्यं नैव च क्षोभः क्षीणसंसरणे नरे॥
क्षीण संसार वाले पुरुष में न हिंसा और न करुणा, न गर्व और न दीनता, न आश्चर्य और न क्षोभ ही होते हैं।
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