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अष्टावक्र गीता • अध्याय 17 • श्लोक 14
सानुरागां स्त्रियं दृष्ट्वा मृत्युं वा समुपस्थितं। अविह्वलमनाः स्वस्थो मुक्त एव महाशयः॥
अनुराग-युक्त स्त्रियों को देख कर अथवा मृत्यु को उपस्थित देख कर विचलित न होने वाला, स्वयं में स्थित वह महात्मा मुक्त ही है।
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