हरो यद्युपदेष्टा ते हरिः कमलजोऽपि वा।
तथापि न तव स्वाथ्यं सर्वविस्मरणादृते॥
यदि तुम्हारे उपदेशक साक्षात् शिव, विष्णु या ब्रह्मा भी हों तो भी सब कुछ विस्मरण किये बिना तुम आत्म स्वरुप को प्राप्त नहीं होगे।
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