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अष्टावक्र गीता • अध्याय 1 • श्लोक 9
एको विशुद्धबोधोऽहं इति निश्चयवह्निना। प्रज्वाल्याज्ञानगहनं वीतशोकः सुखी भव॥
मैं एक, विशुद्ध ज्ञान हूँ, इस निश्चय रूपी अग्नि से गहन अज्ञान वन को जला दें, इस प्रकार शोकरहित होकर सुखी हो जाएँ।
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