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अष्टावक्र गीता • अध्याय 1 • श्लोक 18
साकारमनृतं विद्धि निराकारं तु निश्चलं। एतत्तत्त्वोपदेशेन न पुनर्भवसंभव:॥
आकार को असत्य जानकर निराकार को ही चिर स्थायी मानिये, इस तत्त्व को समझ लेने के बाद पुनः जन्म लेना संभव नहीं है।
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