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अमृतनाद • अध्याय 1 • श्लोक 38
प्राण आद्यो हृदिस्थाने अपानस्तु पुनर्गुदे । समानो नाभिदेशे तु उदानः कण्ठमाश्रितः ॥
आदि प्राण का निवास हृदय क्षेत्र में, अपान का निवास गुदा स्थान में, समान का नाभि प्रदेश में एवं उदान का निवास कण्ठ प्रदेश में है।
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