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अमृतनाद • अध्याय 1 • श्लोक 21
भूमिभागे समे रम्ये सर्वदोषविवर्जिते । कृत्वा मनोमयीं रक्षां जप्त्वा चैवाथ मण्डले ॥
भूमि को स्वच्छ, समतल करके रमणीय तथा सभी दोषों से रहित क्षेत्र में मानसिक रक्षा करता हुआ रथमण्डल (ॐकार) का जप करे।
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