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अमृतनाद • अध्याय 1 • श्लोक 17
नोच्छ्वसेन्न च निश्वासेत् गात्राणि नैव चालयेत् । एवं भावं नियुञ्जीयात् कुम्भकस्येति लक्षणम् ॥
श्वास को न तो अन्त:करण में आकृष्ट करे और न ही बहिर्गमन करे तथा शरीर में कोई हलचल भी न करे। इस तरह से प्राण वायु को रोकने की प्रक्रिया को ‘कुम्भक‘ प्राणायाम का लक्षण कहा गया है।
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