भीष्मजी कहते हैं - राजन्! प्रह्लाद के इस प्रकार पूछने पर लोक-धर्म के विधान को जानने वाले उन मेधावी मुनि ने उनसे मधुर एवं सार्थक वाणी में इस प्रकार कहा:-
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