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आजगरगीता • अध्याय 1 • श्लोक 4
प्रह्लाद उवाच- स्वस्थः शक्तो मृदुर्दान्तो निर्विधित्सोऽनसूयकः । सुवाक् प्रगल्भो मेधावी प्राज्ञश्चरसि बालवत् ॥
प्रह्लाद बोले - ब्रह्मन्! आप स्वस्थ, शक्तिमान्, मृदु, जितेन्द्रिय, कर्मारम्भ से दूर रहने वाले, दूसरों के दोषों पर दृष्टि न डालने वाले, सुन्दर और मधुर वचन बोलने वाले, निर्भीक, प्रतिभाशाली, मेधावी तथा तत्त्वज्ञ होकर भी बालकों के समान विचर रहे हैं।
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