सुखमसुखमलाभमर्थलाभं रतिमरतिं मरणं च जीवितं च ।
विधिनियतमवेक्ष्य व्रतमिदमाजगरं तत्त्वतोऽहं शुचिश्चरामि ॥
सुख-दुःख, लाभ-हानि, अनुकूल और प्रतिकूल तथा जीवन और मरण - ये सब दैव के अधीन हैं। इस प्रकार यथार्थरूप से जानकर मैं शुद्ध भाव से इस आजगर व्रत का आचरण करता हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आजगरगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
आजगरगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।