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आजगरगीता • अध्याय 1 • श्लोक 3
चरन्तं ब्राह्मणं कञ्चित् कल्पचित्तमनामयम् । पप्रच्छ राजा प्रह्लादो बुद्धिमान् बुद्धिसम्मतम् ॥
एक सुदृढ़चित्त, दुःख-शोक से रहित तथा बुद्धिसम्मत ब्राह्मण को पृथ्वी पर विचरते देख बुद्धिमान् राजा प्रह्लाद ने उससे इस प्रकार पूछा:-
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