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आजगरगीता • अध्याय 1 • श्लोक 27
अनियतफलभश्ष्यभोज्यपेयं विधिपरिणामविभक्तदेशकालम्‌ । हृदयसुखमसेवितं व्रतमिदमाजगरं कदर्यै-शुचिश्चरामि ॥
यह अजगर-सम्बन्धी व्रत मेरे हृदय को सुख देने वाला है। इसमें भक्ष्य, भोज्य, पेय और फल आदि के मिलने की कोई नियत व्यवस्था नहीं रहती। अनियतरूप से जो कुछ मिल जाय, उसी से निर्वाह करना होता है। इस व्रत में प्रारब्ध के परिणाम के अनुसार देश और काल का विभाग नियत है। विषयलोलुप नीच पुरुष इसका सेवन नहीं करते, मैं पवित्र भाव से इसी व्रत का आचरण करता हूँ।
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