मैं सदा पवित्र भाव से रहकर इस अजगर वृत्ति का अनुसरण करता हूँ। यह अत्यन्त सुदृढ़, मृत्यु से दूर रखने वाली, कल्याणमय, शोकहीन, शुद्ध, अनुपम और विद्वानों के मत के अनुकूल है। मूर्ख मनुष्य न तो इसे मानते हैं और न इसका सेवन ही करते हैं।
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