धारयामि च चीराणि शाणक्षौमाजिनानि च।
महार्हाणि च वासांसि धारयाम्यहमेकदा ॥
मैं कभी तो चिथड़े अथवा वल्कल पहनकर रहता हूँ, कभी सन के, कभी रेशम के और कभी मृगचर्म के वस्त्र धारण करता हूँ तथा किसी एक काल में बहुत-से बहुमूल्य वस्त्रों को भी पहन लेता हूँ।
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