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आजगरगीता • अध्याय 1 • श्लोक 2
भीष्म उवाच- अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् । प्रह्लादस्य च संवादं मुनेराजगरस्य च ॥
भीष्मजी कहते हैं - राजन्! इस विषय में भी प्रह्लाद तथा अजगरवृत्ति से रहने वाले एक मुनि के संवादरूप प्राचीन इतिहास का दृष्टान्त दिया जाता है।
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