यदि दैवेच्छा से अकस्मात् अधिक भोजन प्राप्त हो जाय तो मैं बहुत खा लेता हूँ, ग्रासमात्र मिले तो उसी में सन्तुष्ट रहता हूँ और न मिला तो बहुत दिनों तक बिना खाये पीये भी सो रहता हूँ।
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