मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
आजगरगीता • अध्याय 1 • श्लोक 18
इति भूतानि सम्पश्यन्ननुषक्तानि मृत्युना । सर्वसामान्यगो विद्वान् कृतकृत्यः सुखं स्वपे ॥
इस प्रकार सारे प्राणियों को मैं मृत्यु के पाश में बद्ध देखता हूँ; इसलिये तत्त्व को जानकर कृतकृत्य हो सबके प्रति समान भाव रखता हुआ सुख से सोता हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
आजगरगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

आजगरगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें