जो यह हृदय है, वही वास्तव में मन है।
और इसी एक चेतन तत्त्व को विभिन्न रूपों में कहा जाता है—
संज्ञान, आज्ञान, विज्ञान, प्रज्ञान, मेधा, दृष्टि, धृति, मति, मनीषा, जूति, स्मृति, संकल्प, क्रतु, असु, काम, वश—
ये सभी नाम वास्तव में उसी एक प्रज्ञान(चेतन-बोध) के हैं।
अर्थात समस्त मानसिक और बौद्धिक अवस्थाएँ एक ही चेतना की विविध अभिव्यक्तियाँ हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ऐतरेय के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।