मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
ऐतरेय • अध्याय 5 • श्लोक 2
यदेतद्धृदयं मनश्चैतत्‌। संज्ञानमाज्ञानं विज्ञानं प्रज्ञानं मेधा दृष्टिधृ। र्तिमतिर्मनीषा जूतिः स्मृतिः संकल्पः क्रतुरसुः कामो वश इति। सर्वाण्येवैतानि प्रज्ञानस्य नामधेयानि भवंति ॥
यह जो हृदय है और मन है — यही (आत्मा के साधन) हैं। संज्ञान, अज्ञान, विज्ञान, प्रज्ञान, मेधा (बुद्धि), दृष्टि, धृति (धारण-शक्ति), मति, मनीषा (गंभीर विचार-शक्ति), जूति (प्रेरणा/तेज), स्मृति, संकल्प, क्रतु (निश्चय), असु (प्राण), काम और वश (इच्छा/नियंत्रण) — ये सभी वास्तव में प्रज्ञान (चेतना) के ही नाम हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ऐतरेय के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

ऐतरेय के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें