पुरुषे ह वा अयमादितो गर्भो भवति यदेतद्रेतः।
तदेतत्सर्वेभ्योऽङ्गेभ्यस्तेजः संभूतमात्मन्येवात्मानं बिभर्ति तद्यदा स्त्रियां सिञ्चत्यथैनज्जनयति तदस्य प्रथमं जन्म ॥
जब पुरुष में स्थित रेतस्(बीज/सूक्ष्म जीवन-तत्त्व) उदित होता है, तो वही उसके भीतर से उत्पन्न होकर सभी अंगों का तेज लेकर एकत्रित होता है और स्वयं में ही स्वयं को धारण करता है।
जब वह इस रेतस् को स्त्री में स्थापित करता है, तब वह वहाँ जीव को उत्पन्न करता है—यह उसका प्रथम जन्म माना जाता है।
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