मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
ऐतरेय • अध्याय 3 • श्लोक 8
तन्मनसाजिघृक्षत्‌ तन्नाशक्नोन्मनसा ग्रहीतुम्। स यद्धैनन्मनसाग्रहैष्यद् ध्यात्वा हैवान्नमत्रप्स्यत्‌ ॥
उसने मन के द्वारा उस अन्न को ग्रहण करने का प्रयास किया, पर वह मन से भी पकड़ा नहीं जा सका। यदि वह केवल मन से ही ग्रहण हो जाता, तो मनुष्य ध्यान करके ही तृप्त हो जाता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ऐतरेय के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

ऐतरेय के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें