मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
ऐतरेय • अध्याय 3 • श्लोक 6
तच्छ्रोत्रेणाजिघृक्षत्‌ तन्नाशक्नोच्छ्रोत्रेण ग्रहीतुं स यद्धैनच्छ्रोतेणाग्रहैष्यच्छ्रुत्वा हैवान्नमत्रप्स्यत्‌ ॥
उसने श्रोत्र (श्रवण-इन्द्रिय) द्वारा उस अन्न को ग्रहण करने का प्रयास किया, पर वह श्रवण से भी पकड़ा नहीं जा सका। यदि वह केवल सुनने से ही प्राप्त हो जाता, तो मनुष्य सुनकर ही तृप्त हो जाता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ऐतरेय के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

ऐतरेय के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें