फिर उसने उनके लिए पुरुष को प्रस्तुत किया।
तब वे बोले—“यह तो वास्तव में श्रेष्ठ कृत्य है।” क्योंकि पुरुष ही वास्तव में सुकृत(उत्तम सृष्टि/कर्म-योग्य आधार) है।
तब उस (प्रजापति) ने कहा—“अब तुम अपने-अपने उचित आश्रय में प्रवेश करो।”
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