उस (पुरुष) को तपाया (सक्रिय किया)।
तप के प्रभाव से उसके अंग प्रकट होने लगे—
मुख (मुँह) खुला → उससे वाणी उत्पन्न हुई, और वाणी से अग्नि
नासिका (नाक) खुली → उससे प्राण (श्वास), और उससे वायु
नेत्र (आँखें) खुलीं → उनसे दृष्टि, और उससे सूर्य
कान खुले → उनसे श्रवण शक्ति, और उससे दिशाएँ
त्वचा (चर्म) प्रकट हुई → उससे बाल, और उनसे वनस्पतियाँ
हृदय प्रकट हुआ → उससे मन, और मन से चन्द्रमा
नाभि प्रकट हुई → उससे अपान वायु, और उससे मृत्यु
पूरा ग्रंथ पढ़ें
ऐतरेय के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।