उस (आत्मा) ने सोचा—
“ये जो लोक मैंने बनाए हैं, इनके रक्षक (लोकपाल) भी बनाऊँ।”
तब उसने जल (आप) से ही एक पुरुष (जीव/मानव रूप) को निकालकर उसे आकार दिया (रूप में स्थापित किया)।
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