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ऐतरेय • अध्याय 1 • श्लोक 2
स इमांल्लोकानसृजत - अम्भो मरीचीर्ममापोऽम्भः परेण दिवं द्यौः प्रतिष्ठाऽन्तरिक्षं मरीचयः॥ पृथिवी मरो या अधस्तात्ता आपः ॥
उस (आत्मा) ने इन लोकों की रचना की— अम्भः → स्वर्ग के ऊपर का जलमय लोक मरीचि → आकाश (अंतरिक्ष, जहाँ प्रकाश फैलता है) मर (मर्त्य लोक) → पृथ्वी (जहाँ मनुष्य रहते हैं)
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