स इमांल्लोकानसृजत - अम्भो मरीचीर्ममापोऽम्भः परेण दिवं द्यौः प्रतिष्ठाऽन्तरिक्षं मरीचयः॥ पृथिवी मरो या अधस्तात्ता आपः ॥
उसने इन लोकों की सृष्टि की—
अम्भस्(जल-तत्त्व/प्राथमिक सृष्टि), मरीचि(प्रकाश/सूक्ष्म किरणें), और मरा(स्थूल भौतिक क्षेत्र)।
इनसे क्रमशः—
द्यौः(स्वर्गलोक) का निर्माण हुआ, जो सर्वोच्च प्रतिष्ठा है
अन्तरिक्ष(मध्य लोक) मरीचियों से बना
पृथ्वी और उसके नीचे स्थित जल-तत्त्व का स्वरूप प्रकट हुआ
इस प्रकार यह सम्पूर्ण लोक-व्यवस्था उसी आत्मा से प्रस्फुटित हुई।
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