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अद्वयतारक • अध्याय 1 • श्लोक 6
लक्ष्यत्रयानुसन्धानविधिः तत्सिद्ध्यै लक्ष्यत्रयानुसंधानं कर्तव्यं ॥
उस (तेजोमय परब्रह्म) की सिद्धि के लिए तीन लक्ष्यों का अनुसंधान ही करणीय कर्तव्य है।
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