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अद्वयतारक • अध्याय 1 • श्लोक 3
॥अथ अद्वयतारक उपनिषद् ॥ अथातोऽद्वयतारकोपनिषदं व्याख्यास्यामः । यतये जितेन्द्रियाय शमादिषड्गुणपूर्णाय ॥
अब अद्वयतारकोपनिषद् की व्याख्या योगियों, संन्यासियों, जितेन्द्रियों तथा शम, दम आदि षड्गुणों से पूर्ण साधकों के लिए करते हैं।
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