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अद्वयतारक • अध्याय 1 • श्लोक 17
गुरुभक्तिसमायुक्तः पुरुष्ज्ञो विशेषतः । एवं लक्षणसम्पन्नो गुरुरित्यभिधीयते ॥
गुरुभक्त, परमात्मा की प्राप्ति में विशेष रूप से संलग्न रहने वाला - इन उपर्युक्त लक्षणों से सम्पन्न पुरुष ही गुरु रूप में अभिहित किया जाता है।
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