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आत्मबोध • अध्याय 2 • श्लोक 8
वेद्योऽहमगमास्तैराराध्योऽहं सकलभुवनहृद्योऽहम् । परमानन्दघनोऽहम् परमानन्दैकभूमरूपोऽहम् ॥
मैं वेदान्त के द्वारा जाना जाता हूँ, आराधना के योग्य हूँ, सभी भुवनों में अनुपम सुन्दर हूँ, मैं परमानन्दघन स्वरूप हूँ तथा मैं ही परमानन्द रूप एकमात्र भूमा स्वरूप हूँ।
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