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आत्मबोध • अध्याय 2 • श्लोक 6
एकोऽहमविकलोऽहं निर्मलनिर्वाणमूर्तिरेवाहम् । निरवयोऽहमजोऽहं केवलसन्मात्रसारभूतोऽहम् ॥
मैं एक हूँ, मैं अविकल अर्थात् परिपूर्ण हूँ, मैं निर्मल एवं निर्वाण मूर्ति हूँ। मैं अवयवों से रहित तथा मैं ही अजन्मा हूँ। केवल सत्स्वरूप में सब का सारभूत मैं ही हूँ।
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