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आत्मबोध • अध्याय 2 • श्लोक 3
साक्ष्यहमनपेक्षोऽहं निजमहिम्नि संस्थितोऽहमचलोऽहम् । अजरोऽहमव्ययोऽहं पक्षविपक्षादिभेदविधुरोऽहम् ॥
मैं साक्ष्य रूप तथा किसी भी तरह की अपेक्षा से रहित हूँ। मैं अचल होकर अपनी महिमा में ही प्रतिष्ठित हूँ। मैं अजर, अमर हूँ तथा पक्ष-विपक्ष आदि भेद से रहित हूँ।
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