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आत्मबोध • अध्याय 2 • श्लोक 24
जडत्वप्रियमोदत्वधर्माः कारणदेहगाः । न सन्ति मम नित्यस्य निर्विकारस्वरूपिणः ॥
मुझमें इनमें से कोई भी विकार नहीं है। जड़ता, प्रियता और आनन्द मनाना आदि कारण शरीर के धर्म हैं ॥ मैं तो नित्य और निर्विकार स्वरूप से युक्त हूँ, अतः ये (उपर्युक्त) सभी मेरे धर्म नहीं हैं।
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