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आत्मबोध • अध्याय 2 • श्लोक 10
शुद्धोऽहमान्तरोऽहं शाश्वतविज्ञानसमरसात्माहम् । शोधितपरतत्त्वोऽहं बोधानन्दैकमूर्तिरेवाहम् ॥
मैं पवित्र हूँ, अन्तरात्मा हूँ तथा मैं ही सनातन विज्ञानं का पूर्ण रस 'आत्मतत्त्व' हूँ। शोध (अनुसन्धान) किया जाने वाला परात्पर आत्मतत्त्व हूँ और मैं ही ज्ञान एवं आनन्द की एकमात्र मूर्ति हूँ।
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