घटाकाशं महाकाश इवात्मानं परात्मनि।
विलाप्याखण्डभावेन तूष्णीं भव सदा मुने ॥
हे मुने! महाकाश में घटाकाश के समान परमात्मा में आत्मा को विलीन (एकरूप) करके अखण्ड भाव से सदैव शान्त रहो।
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