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अध्यात्म • अध्याय 1 • श्लोक 70
असङ्गोऽहमनङ्गोऽहमलिङ्गोऽहमहं हरिः । प्रशान्तोऽहमनन्तोऽहं परिपूर्णश्चिरन्तनः ॥
मैं सङ्ग रहित हूँ, अङ्ग रहित हूँ, चिह्न रहित और स्वयं हरि हूँ। मैं प्रशान्त हूँ, अनन्त हूँ, परिपूर्ण और चिरन्तन अर्थात् प्राचीन से प्राचीन हूँ।
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