(गुरु के इस उपदेश से शिष्य को ज्ञान हो गया और वह कहने लगा) जिस जगत् को अभी मैंने देखा था, वह कहाँ चला गया? किसके द्वारा वह हटा लिया गया ? वह कहाँ लीन हो गया? बहुत आश्चर्य का विषय है कि अभी तो वह मुझे दिखाई पड़ रहा था, क्या वह अब नहीं है?
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