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अध्यात्म • अध्याय 1 • श्लोक 63
प्रत्यगेकरसं पूर्णमनन्तं सर्वतोमुखम् । अहेयमनुपादेयमनाधेयमनाश्रयम् ॥
अध्यय प्रत्थ, एकरस, पूर्ण अनन्त, सब ओर मुख वाला, त्याग और ग्रहण न करने वाला किसी आधार के ऊपर न रहने वाला और किसी का आश्रय भी न लेने वाला
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