ज्ञानेनाज्ञानकार्यस्य समूलस्य लयो यदि तिष्ठत्ययं कथं देह इति शङ्कावतो जडान् ॥
यदि अज्ञान (देहासक्ति आदि) का पूर्ण विलय ज्ञान में हो जाये, तो फिर देह का अस्तित्व ही कैसे रह सकता है, ऐसी शंका जड़ (स्थूल) बुद्धि वाले ही करते हैं।
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