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अध्यात्म • अध्याय 1 • श्लोक 44
ब्रह्मण्येव विलीनात्मा निर्विकारो विनिष्क्रियः । ब्रह्मात्मनोः शोधितयारेकभावावगाहिनि ॥
जिसका आत्मतत्त्व एकमात्र ब्रह्म में ही विलीन हुआ हो, वह निर्विकार और निष्क्रिय हो जाता है। ब्रह्म और आत्मा के एकत्व के अनुसंधान में लोन हुई वृत्ति,
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