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अध्यात्म • अध्याय 1 • श्लोक 42
वासनानुदयो भोग्ये वैराग्यस्य तदावधिः । अहंभावोदयाभावो बोधस्य परमावधिः ।।
(जब) भोगने योग्य पदार्थ की उपस्थिति में भी वासना उदित न हो, तब वैराग्य की स्थिति जान लेनी चाहिए और जब अहं भाव के उदय का अभाव हो जाए अर्थात् जब वैसी (अहंकार होने योग्य) परिस्थिति बन जाने पर भी अहं न आये, तब ज्ञान की परम स्थिति जाननी चाहिए।
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