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अध्यात्म • अध्याय 1 • श्लोक 31
मायोपाधिर्जगद्योनिः सर्वज्ञत्वादिलक्षणः । पारोक्ष्यशबलः सत्याद्यात्मकस्तत्पदाभिधः ॥
मायारूप उपाधि से युक्त, जगत् का कारणरूप सर्वज्ञत्व आदि लक्षणों से युक्त, परोक्ष रूप से शबल (अर्थात् मायावेष्टित) ब्रह्म जो सत्यादि स्वरूप वाला है, वही 'तत्' शब्द से विख्यात है।
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